गैरसैंण में प्रस्तावित उत्तराखंड विधानसभा बजट सत्र 2026 भले ही 9 मार्च से शुरू होना है, लेकिन सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक हलचल अभी से तेज हो गई है। सत्र के पहले ही दिन राज्यपाल के अभिभाषण के साथ बजट पेश करने के प्रस्तावित कार्यक्रम ने सियासी माहौल को गरमा दिया है।
विधानसभा सचिवालय की ओर से सभी विधायकों को भेजे गए पत्र में उल्लेख किया गया है कि 9 मार्च को राज्यपाल का अभिभाषण और वित्तीय वर्ष 2025-27 का बजट प्रस्तुतीकरण एक ही दिन होगा। संसदीय परंपरा के अनुसार, वर्ष के पहले सत्र में आमतौर पर पहले दिन केवल राज्यपाल का अभिभाषण होता है। ऐसे में इस निर्णय को राजनीतिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है।
मुख्य विपक्ष भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने सरकार पर संसदीय परंपराओं की अनदेखी और विपक्ष के सवालों से बचने का आरोप लगाया है। विपक्ष का कहना है कि यह कदम कार्यमंत्रणा समिति में उनकी भागीदारी को लेकर दबाव बनाने की रणनीति हो सकता है।
दरअसल, पिछले वर्ष गैरसैंण में आयोजित सत्र के दौरान विपक्ष ने तीखा विरोध दर्ज कराया था। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य और विधायक प्रीतम सिंह ने कार्यमंत्रणा समिति से त्यागपत्र दे दिया था, हालांकि उनके त्यागपत्र अब तक स्वीकार नहीं हुए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बजट सत्र से पहले शुरू हुई यह बयानबाजी आगामी दिनों में और तेज हो सकती है। बजट सत्र में वित्तीय प्रावधान, विकास योजनाएं और नीतिगत फैसले चर्चा के केंद्र में रहेंगे, वहीं विपक्ष सरकार को जवाबदेही और पारदर्शिता के मुद्दों पर घेरने की तैयारी में है।
गैरसैंण में होने वाला यह सत्र केवल बजट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह संसदीय परंपराओं, लोकतांत्रिक विमर्श और सत्ता-विपक्ष के संतुलन की भी परीक्षा मानी जा रही है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि सियासी बिसात पर किसकी चाल भारी पड़ती है।